ध्यान क्या है?

ध्यान या मैडिटेशन(meditation) अपनी चेतना को, अपने मन को अपने वश में करने का सबसे बेहतर तरीका है। ध्यान करने से आप अपने लक्ष्य तक पहुँचने में आसानी सफल हो जाते है। ध्यान से आपकी आंतरिक उर्जा बढती है। इसे करने से व्यक्ति करुणामयी, प्रेमशील, धैर्यवान, क्षमाशील और उदार बनता है।

खुद को मानसिक शांति देने के लिए ध्यान सबसे बेहतर तरीका होता है। ध्यान का पहला नियम है अनुभव। जैसे अपने चारो ओर प्रकृति की ख़ूबसूरती का अनुभव।

ध्यान के प्रकार: 

ध्यान 4 प्रकार के होते है:

  • रोद्र ध्यान(dire attention): किसी से छल के बारे में सोचना या अपने ही लाभ के बारे में सोचना रोद्र ध्यान कहलाता है।
  • आर्त ध्यान(Aggrieved attention): खुद के बारे में, अपने परिवार के बारे में चिंतन करना आर्त ध्यान कहलाता है।
  • धर्म ध्यान(spitual meditation): अपनी गलतियों को स्वीकार कर के जीवन में उसका सुधार करने के बारे में सोचना धर्म ध्यान कहलाता है।
  • शुक्ल ध्यान(shukla meditation) : किसी के अपमान या फिर सत्कार करने के बावजूद भी अगर व्यक्ति एक ही मुद्रा में रहे तो वो शुक्ल ध्यान कहलाता है।

ध्यान करने का चरण:

  • सही समय और सही जगह चुने: ध्यान करने के लिए उपयुक्त जगह और सही समय का होना बहुत जरुरी है। जिस भी जगह आप ध्यान लगाते है वो जगह साफ़ सुथरी होनी चाहिए। वहां का वातावरण शुद्ध और शांत होना चाहिए।
  • मन को शांत कर के बैठे: ध्यान लगाने से पहले किसी भी तरह की चिंता या तनाव को भूल जाए। ध्यान का पहला नियम ही ये की आप शांतचित्त होकर बैठे।
  • सीधा बैठे: ध्यान लगाते वक्त आप किस मुद्रा में बैठते है इस बात का ध्यान रखना बहुत ही आवश्यक होता है। ध्यान करते वक्त आप बिलकुल सीधा बैठे।
  • खाली पेट रहे: ध्यान करने के लिए खाली पेट रहना ज्यादा लाभकारी होता है। खाना खाने से कुछ समय पहले ध्यान करना सही होता है लेकिन ध्यान रखे की अगर भूख बहुत ज्यादा हो तो ध्यान करने से कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि तेज भूख से आपके पेट में ऐंठन हो सकती है। इसीलिए जब हल्की भूख हो तभी ध्यान करे।
  • गहरी लम्बी सांस ले: जब भी आप ध्यान की मुद्रा में बैठते है तो गहरी लम्बी साँसे जरुर ले। इससे दिल और दिमाग दोनों शांत होते है। गहरी सांस से आप तनावमुक्त महसूस करते है।
  • हल्का वार्मअप जरुर करे: वार्मअप करने से ध्यान में अगर आप ज्यादा देर बैठते है तो भी आपको बैचेनी या परेशानी नहीं होती। ध्यान करने से हल्का वार्मअप जरुर करे। इससे आपकी मांसपेशियों की जकड़न खत्म हो जाती है और आप सीधे होकर काफी समय तक बैठ पाते है।
  • आँखों को धीरे-धीरे बंद करे और खोले: ध्यान की मुद्रा में बैठने के लिए आपकी आँखों का बंद होना जरुरी है। तभी आप मानसिक तौर पर ध्यान लगा पाएंगे। इसीलिए अपनी आँखों को बड़ी सौम्यता के साथ बंद करे और आराम आराम से खोले।
  • चेहरे पर रखे मुस्कान: ध्यान करने से आपको मानसिक शांति का अनुभव होना चाहिए। हमेशा अपने चहरे पर हलकी सी मुस्कान रखे। इससे आपका मन सदैव प्रसन्न चित्त रहेगा।

ध्यान करते वक्त आप अपनी साँसों की आवाज तक सुन सकते है साथ ही अपनी साँसों को अंदर-बाहर आते जाते हुए देख सकते है और ऐसा तभी होता है जब आप पूरी तरह से समर्पित भाव से ध्यान करने बैठे।

 

ध्यान करने के लाभ:

  • ध्यान आपको मानसिक और शारीरक तौर पर स्वस्थ बनाता है।
  • जो व्यक्ति लगातार ध्यान करता है वो हमेशा खुश रहता है। बड़ी से बड़ी समस्या उनके आगे कमतर हो जाती है।
  • ध्यान से ही व्यक्ति परमात्मा को पा सकता है। इससे व्यक्ति के मन से क्लेश, द्वेष, घृणा, जलन और हीनभावना जैसी प्रवृत्ति ख़त्म हो जाती है और व्यक्ति सभी को एक सामान देखने लगता है।
  • ध्यान व्यक्ति को सांसारिक कष्टों से निजात दिलाने में असरदार होता है।
  • व्यक्ति की रचनात्मक गुण में वृद्धि होती है।
  • ध्यान करने से नींद न आने की समस्या दूर हो जाती है।
  • ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल में रहता है।
  • ध्यान आपके आत्मविश्वास को बढ़ता है।
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