क्या होता है योग

21 जून को भारत समेत पुरे विश्व में योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। योग(yoga) भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है। योग का इतिहास लगभग 5 हज़ार साल से भी पुराना है। एक्सरसाइज(exercise) और जिम(gym) के समय में भी योग सबसे ऊपर माना गया है।

योग का महत्व:

योग व्यक्ति को मानसिक, अध्यात्मिक, भौतिक, आत्मिक और शारीरिक तौर पर स्वस्थ बनाता है।

हमारी व्यस्त जिन्दगी में शांति और सुकून की सबसे ज्यादा जरूरत होती है और योग एक ऐसा जरिया है जिससे आपको मानसिक और शारीरिक शांति दोनों ही मिलती है।

योग करने के नियम:

  • योग का समय: योग को हमेशा सूर्योदय या सूर्यास्त के समय ही करना चाहिए।
  • बिना नहाये न करे: योग के लिए शरीर के साथ साथ मन का भी शुद्ध होना जरुरी है। इसीलिए सुबह योग करने से पहले स्नान जरुर करे। और शाम को योग करने के बाद कम से कम 1 घंटे तक न नहाये।
  • भूखे पेट रहना है जरुरी: सुबह के वक्त खाली पेट ही योग करे और शाम को अगर योग करते है तो कम से कम 3 घंटे पहले से ही कुछ न खाए। खाली पेट योग करने से आपका ध्यान योग की तरफ लगा रहता है।
  • साफ़ सुथरी और खुली जगह: योग हमेशा साफ़-सुथरी और खुली हवादार जगह पर करना चाहिए। योग मन को शांत और प्रसन्नचित्त रखने में बहुत ही असरदार होता है और अगर योग की जगह साफ़-सुथरी न हो तो ध्यान योग की तरफ नहीं लगता। साथ ही जिस भी जगह आप योग करते है वहां शांति होनी चाहिए।
  • रोजाना जरुरी है योग: अगर आप योग करने का पूरा लाभ उठाना चाहते है तो आपको योग रेगुलर करना होगा। हालाँकि किसी भी रोग को ठीक होने में थोडा वक्त तो लगता ही है इसीलिए इसका अभ्यास न छोड़े। इसे लगातार करते रहे। देर से ही सही योग का लाभ जरुर मिलेगा।
  • पूरा आराम और पोष्टिक भोजन करे: अगर आप रोजाना योग करते है तो आपको पूरा आराम करना भी जरुरी है। नींद पूरी करे और पोष्टिक भोजन का सेवन करे। इससे आपको योग करने का लाभ जल्दी मिलेगा।
  • खुद के साथ करे जबरदस्ती: कई बार जाई आसन करने में आप सफल नहीं हो पाते इस लिए योग को जबरदस्ती न करे। निरंतर अभ्यास से आप धीरे-धीरे सफल हो जायेंगे लेकिन अगर अपने साथ जबरदस्ती करने का प्रयास करते है तो आपको तकलीफ हो सकती है।

योग करने के मुख्य अंग:

  • यम: योग का पहला अंग यम कहलाता है। मनुष्य के पाँच गुण को दर्शाता है।
  1. सदैव अहिंसा के मार्ग पर चलना।
  2. कभी भी झूठ न बोलना।
  3. हमेशा सच का साथ देना।
  4. त्याग की भावना रखना।
  5. दुसरो की चीजों पर नज़र न रखना।
  • नियम: नियम मनुष्य के आत्मसमर्पण की भावना को दर्शाता है। इसमें पाँच धार्मिक क्रिया शामिल है।
  1. आत्म संतुष्टि।
  2. मन की पवित्रता।
  3. तपस्या।
  4. अध्ययन।
  5. खुद का समर्पण अपने भगवान् के लिए।
  • आसन:  आसन का अर्थ है बैठने की मुद्रा। योग के समय किस प्रकार से बैठे, ध्यान की मुद्रा।
  • प्राणायाम:  जीवन शक्ति को किस तरह से खुद के नियंत्रित में करे। अपनी सांसो को अपने वश में करना। अपनी साँसों को शरीर के अंदर और बाहर करने के तरीके को प्राणायाम कहा जाता है।
  • प्रत्यहार:  इसका अर्थ है की अपने आप को भूल कर अपना ध्यान केवल अपने भगवन पर लगाना। बाहरी मोह माया से खुद का अलगाव ही प्रत्यहार कहलाता है।
  • धारणा:  खुद को अपने लक्ष्य पर आत्म केन्द्रित कर लेना। केवल अपने लक्ष्य को ही सबकुछ मान कर केवल उसके बारे में सोचना।
  • ध्यान:  ध्यान का मतलब है गहन चिंतन। चिंतन जिससे मनुष्य अपने कष्टों से बाहर आ जाता है। ध्यान साधना से ऊपर होता है।
  • समाधी:  खुद को इश्वर में लीं कर देना। समाधी के पश्चात् मनुष्य की आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है और योग के यही असली मतलब है।
[addthis tool="addthis_inline_share_toolbox_l63x"]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *