योग के शुरूआती आसन

योग करने के कितने लाभ है इस बात से हम अनजान नहीं है लेकिन बहुत से लोगो को ये पता ही नहीं होता की कौन सा योग आपके लिए स्वस्थकारी है और कौन सा हानिकारक।

योग आपको सबसे ज्यादा फायदा पहुँचाता है लेकिन अगर इसे सही आसन और सही तरीके से न किया जाए तो ये आपको नुक्सान पहुँचाने लगता है।

आसन क्या है:

अपनी सहूलियत के अनुसार शांत चित्त और स्थिर हो कर बैठना ही आसन कहलाता है। आसान के दौरान आपके मन की स्थिरता और आपकी शारीरक द्रढ़ता बहुत ही महत्वपूर्ण है।

आसन के प्रकार:

योग के दो आसन प्रमुख होते है:

  • गतिशील आसन: गतिशील आसन को करने के दौरान आपके शरीर को गति करने के लिए शक्ति की जरूरत होती है।
  • स्थिर आसन: स्थिर आसन के दौरान आपको केवल अपने अभ्यास पर ध्यान देना होता है। इसमें आपकी शारीरिक गतिविधियाँ कम होती है।

महर्षि पतंजलि के योग शास्त्र में 101 योग के आसन बताये गए है। जो अलग-अलग तरीके से व्यक्ति को लाभ पहुंचाते है। लेकिन जो लोग पहली बार योग करने का प्रयास कर रहे है उनके लिए शुरूआती आसन बहुत उपयोगी होते है।

अधोमुख स्वानासन (Adho Mukha Svanasana):

अधो मुख स्वानासन करते समय व्यक्ति का शरीर एक कुत्ते की तरह आगे की तरफ झुक जाता है यह आसन सूर्य नमस्कार का एक अंश होता है। सारा भार आपके दोनों पैरो और हाथों पर होता है ओर आपकी पीठ ऊपर की तरफ होती है और आपके दोनों हाथों की हथेलिया पूरी तरह से जमीन से लगे होती है और आपकी बाहें कानो को स्पर्श करनी चाहिए।

इस आसन से आपका शरीर और आपकी रीढ़ की हड्डिया लचीली होने लगती है। शारीरिक थकान खत्म होती है। सरदर्द और नींद न आने जैसी समस्या दूर हो जाती है।

ताड़ासन(Tadasana):

ताड़ को इंग्लिश में माउंटेन कहा जाता है। इस आसन में व्यक्ति को पूरी तरह से सीधा खड़ा होना होता है। उसके बाद अपने दोनों हाथो को सर के ऊपर लेकर जाए और धीरे-धीरे अपने शरीर को ऊपर की तरफ खींचते हुए अपने पैर के अंगूठो के बल खड़े हो जाये।ऊपर जाते वक्त आप लम्बी सांस को अपने अंदर भरे। फिर इसके बाद इसे उल्टा करते हुए साँसों को छोड़ते हुए नीचे आ जाए।

ताड़ासन करने से आपका वजन कम होता है, आपकी ऊँचाई बढती है, जोड़ो के दर्द और मांसपेशियों के खिचाव को दूर करके शरीर को लचीला बनाता है।

ताड़ासन को गर्भवती महिलाओ को नहीं करना चाहिए।

वीरभद्रसन-I(Virabhadrasana-I):

वीरभद्र भगवान् शिव के 19 अवतारों में से एक है। ये आसन आपके मन में साहस और बहादुरी और शांति को बढ़ाता है।

जो लोग योग की शुरुआत कर रहे है उनके लिए वीरभद्र आसन बिलकुल सही होता है। इस आसन को करने के अनेक लाभ है।

जो व्यक्ति कई कई घंटे बैठ कर लगातार काम करते है उन्हें रीड और कमर से जुडी परेशानिया होना स्वाभाविक है। इस आसन को करने से आपको कमर दर्द, कंधे में जकड़न, हाथ-पैरो मजबूती और संतुलन और तनाव से मुक्ति दिलाने में काफी फायदेमंद है।

उत्थिता पार्स्व कोण आसन(Utthita Parsvakonasana):

उत्थिता पार्स्व कोण आसन तीन शब्दों को मिलकर बनाया गया है। उत्थिता का मतलब होता है उठा हुआ, पार्श्व का मतलब होता है बगल का भाग और कोण का मतलव होता है कोना।। इस आसन में आपको अपना हाथ अपनी दाहिने पैर की तरफ झुकते हुए अपने दायें पैरो को छूना होता है। इस आसन को करने से आपका स्टैमिना बढ़ता है, गर्भावस्था के दौरान महिलाओ को होने वाले जॉइंट्स पैन, पीठ दर्द, पैरो और मांसपेशियों में खिचाव लाने में बहुत ही लाभकारी है।

जिन महिलाओ को बाँझपन, अनिमियत माहवारी या फिर पीरियड्स के दौरान दर्द का सामना करना पड़ रहा है उनके लिए उत्थिता पार्स्व कोण आसन बहुत लाभकारी है।

ध्यान रखे: इन सभी आसनों को करते समय एक बार में ही पूरी कोशिश न करे। धीरे-धीरे अभ्यास करे।

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